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मोर कथा कन यदि मयनार वरावर |
कैलाश भूवन मोर कैर्व्वे नण्ड भण्ड |

एक सत्य दुइ सत्य तिन सत्य हरि |
तोमार कथा यदि कयों महा पापे मरि ॥
येत रायुत जन परामस करिया ।
खीकलेर हाठत नागिया यान चलिया ||

धुप सिन्दुर नेन पातिल भरिया ।
हांस तर नेन खाचा भरिया ||
धोला पांठा नेन रसी साइङ्ग करिया ।

रविवार दिन निरा थाकिया पारनी गङ्गा यान चलिया ॥

धर्मरे थान गङ्गा किनारे वान्धिया ।
धोला पांटा देन वालु छेद करिया ||
हांस कत गुला देन घाटे उकरगिया ।
धूप सिन्दुर ट्रेन घाटे ज्वालाझ्या ॥
फिन्ना विन्नार थोप याने उपारिया ।
नांटि चिपिया साप देन छाड़िया ।
ऐ साप निले अञ्चल पातिया ||

रविवार दिन लोके सांत्री दिल |
सोमवार दिन राजार ए ज्वरि करिल ॥
मङ्गलवार दिन राजा काहिला पड़िल ।
वुधवारे राजा अन्न पानि छाड़िल ||
विसुदवारे राजा ए गुरु छाड़िल |

फिर मङ्गलवारे चित्र गोविन्द दफ्तर खुलिल ॥

सति राजा हइल राज्येर भितर ।

सेइ राजाक लैया आइस यमालयेर भितर ॥

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मानिक चन्द्र राजार क्यु मास परमाइ दफ्तर नागाइल पाइल |

वेन्ना मुख हैये समन राजाक वलिव र लागिल ॥

३८‍

३६

२९ । नागिया = लागिया ॥ ३१ । निरा = निरशन (१) । ३२ । थान = स्थान || ३४ । साप == शाप || ३५ | सांचो

== शाप ॥

U

आवाल यमके डाकिवार लागिल ।

गोदा यमेर नामे चिठि हाम्रोलात कैरे दिल ||

तोक वलों गोदा यम वाक्य मोर धर ।
हाते गले मानिक चन्द्र राजाक वान्धिया हाजिर कर ॥
चामेर दड़ि लोहार डाङ्ग नैले गिरो दिया |
तखने गोदा यम चलिल हाठिया ॥

कत दुरे येथे गोदा कत पाछा पाय ।
कतक याइते मानिक चन्द्र राजार वाड़ी पाय ॥
छय मासेर काहिला राजा महलेर भितर ।
तो खवर नाहि करे मयुना सुन्दर ॥

तोक वलों ये नेङ्गा पात्र वाक्य मोर धर ।
एइ कथा जाना गिये मयुनार वरावर ॥
छय मासेर काहिला राजा महलेर भितर ।
देखा कैरवार चाय राज राजेश्वर ॥
ए कथा शुनिया नेङ्गा ना थाकिल रैया ।
मयुनार महले चलिल हांटिया ॥
आग दुयारे मयना मर्ति पसार खेलाय ।
खिरकिर दुयारे दिया परनाम जानाय ॥

केने केने नेङ्गा आइलेन कि कारन ॥

नेजा वले सान मा सोन समाचार |
छय मासेर काहिला राजा महलेर भितर ॥
देखा कैरवार चाय राज राजेश्वर ॥
धेयाने मयना मति धेयान कैरे चाय ।
धेयानेर मध्ये यमेर नागाल पाय ॥
यानिल बाङ्गला गुया मिठाभरि पान |
ऐ वाङ्गला गुया काटाइर दिया करे दुइ खान ॥
पानेर वुके चुनेर नेओया दिया

हेट खिलि उपर खिलि माझ्ल्ले तुलिया ||

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४७ | रैया = रचिया ॥

शोल पुटि ज्ञान दिले खिलित भरिया ।
पानेर वाटा वान्दिर माथाय दिया ||
निकलिल मयना मति यात्रा करिया ।
ऐ राजार महाले उत्तरिल गिया ॥

केने केने महाराजा डाकिले कि कारन ॥

छय मासेर काहिला राजा महलेर भितर ।
तत्त खवर ना करेन मयुना सुन्दर ||
मयना वले सोन राजा राज राजेश्वर ।
आमार सरीरेर ज्ञान नेो वाल सिकिया ।
आमार वसेर नदी कन्दे यावे सुखाइया ॥
आमार वयसे वड़ वृक्ष यावे मरिया |
दुइ

जने राजा कि करिम घर जुयान हुइया ॥

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જૂ

પૂ

५६

५७

પૂર

પૂ

६०

६९

६२

६३

६४

गर्भ ॥ ६१ | दुपर

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एइ कथा सुनिया मयुना रोदन करिवार नागिल |
लक्ष टाकार झाड़ि पाकाइया फेलिल ||
चौह ताल जलेर मध्ये मयना आसन करिल |

विधि आमार दुःखेर कपाल । येमन विन्दार गोपाल ||
भाङ्गा नौका छिड़ा काछि गुरु केमने हवे पाड़ ||
यदि आमार गुरु सहाय थाके ।

धरम हाइल धरे, भाङ्गा नौका छिड़ा काछि
गुरु लाइगाव किराने ॥ धुया |

परिधानेर साड़ी बर्द्ध खान मयुना मती दिल जलत विछाया ।
योग आसन धरिल मयना धरम सरन करिया ॥

तुडु तुड़ करिया मयना डङ्कार छाड़िल |
छय मासेर दरिया छयु दण्डे पार हइल |
यमपुरि लागिया चलिल हांटिया ।
छत्रिस कुटि यम दरवार वसिके ॥

कपाले सिन्दुर मझ्लान देखिल ॥
हातेर सांखा काल देखिल ।

लक्ष टाकार दुइ मुठ सांखा मस्तके भाङ्गिल ॥

८२

स्यामि हारा हया रे । आर कत दिन रव चायारे ॥ धुया ॥ ८३

महलत लागिया मयना चलिल हाटिया |
येन मयना मति मन्दीरे सान्दाइल |
आग प्रदीप पाक प्रदीप लागाइया दिल ॥
यमालय लागिया मयुना चलिल हाटिया ।
नदीर पारे मयुना मति गेल चलिया ॥
नदी देखिया मयना भयङ्कर हइल |
छयु मास ओसार नदी वरत पड़े खेया ।
एक एक छेउ उठे पर्व्वतेर चूड़ा ॥

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८१

८४

વ્યૂ

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ह१

८८ | किराने = Gjlis 1

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